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Showing posts from January, 2026

गुरुकुल के अभाव में आध्यात्मिक भ्रम क्यों बढ़ रहा है

हमारी पुरानी परंपरा में आध्यात्म कभी भी सिर्फ किताबों या बातों का खेल नहीं था। यह पूरी तरह से अनुभव और खुद को साधने का रास्ता था। उस समय ज्ञान ऐसे ही किसी को नहीं थमा दिया जाता था; पहले सामने वाले को उस ज्ञान को संभालने लायक बनाया जाता था। यही वजह थी कि गुरुकुलों में पढ़ाई की शुरुआत सीधे पूजा-पाठ या भारी-भरकम मंत्रों से नहीं होती थी। सबसे पहले तो छात्र के मन, उसके बर्ताव और दुनिया को देखने के नजरिए पर काम किया जाता था। उसे तैयार किया जाता था। लेकिन आज? आज वह पुरानी व्यवस्था लगभग गायब हो चुकी है। आजकल हम में से ज्यादातर लोग आध्यात्म से पहली बार सोशल मीडिया पर ही टकराते हैं। आप स्क्रॉल कर रहे हैं और अचानक कोई किसी देवी की साधना बता रहा है, कोई गुप्त मंत्र दे रहा है, तो कोई उपाय बता रहा है। इन सबमें एक बहुत बड़ी कमी है -  नींव की। कोई यह नहीं पूछता या बताता कि देखने वाला अभी किस मानसिक स्थिति में है या उसे सबसे पहले क्या समझने की जरूरत है। यहीं से सारी उलझन शुरू होती है। जब हम बिना किसी तैयारी के, बिना आधार के बड़ी-बड़ी साधनाएं या उपाय करने लगते हैं, तो शांति मिलने के बजाय मन और उलझ ...